पाकुड़ (PAKUR): हिरणपुर फतेहपुर में निर्माणाधीन स्वयं सहायता समूह (SHG) प्रशिक्षण केंद्र एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार आरोप सीधे निर्माण की गुणवत्ता पर हैं—और सवाल इतने गंभीर हैं कि पूरे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है।
मुद्दा क्या है?
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य सरकारी मानकों से कोसों दूर हो रहा है।
👉 साइट पर न सूचना पट
👉 निगरानी और गुणवत्ता जांच का अभाव
👉 निर्माण में मिट्टी मिश्रित बालू, स्थानीय ईंट और कमजोर सरिया का इस्तेमाल
यह सब मिलकर एक ऐसे ढांचे की तस्वीर पेश करता है, जो भविष्य में खतरे का कारण बन सकता है।
🧱 ‘अंदर की बात’ ने बढ़ाई टेंशन
मामले ने उस वक्त तूल पकड़ा जब निर्माण कार्य में लगे एक मिस्त्री ने ही यह स्वीकार कर लिया कि काम में कमजोर और मानकहीन सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है।
➡️ इस खुलासे के बाद सवाल और गहरे हो गए हैं—
क्या जानबूझकर गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है?
🤐 चुप्पी में छिपे सवाल
हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले पर संबंधित विभाग के अधिकारी अब तक चुप हैं।
👉 न कोई बयान
👉 न कोई जांच की घोषणा
इस खामोशी ने ग्रामीणों के बीच मिलीभगत की आशंका को और हवा दे दी है।
⚠️ ग्राउंड से उठी चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा है—
“अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भवन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।”
👉 प्रशासन से मांग:
निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच
दोषियों पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा—
➡️ “मिली जानकारी के आधार पर जांच कराई जाएगी।”
➡️ “गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” 
❗ अब सबसे बड़ा सवाल
👉 क्या यह सिर्फ लापरवाही है… या कोई बड़ा खेल?
👉 क्या जांच में सामने आएगी असल सच्चाई?
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Desk Report by IN TV








