‘मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं, प्रेम और भाईचारा ही समाज की असली ताकत’ — लुत्फुल हक
पाकुड़ (Pakur): झारखण्ड के पाकुड़ में दुर्गापूजा के पावन अवसर पर पाकुड़ में धार्मिक आस्था, आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। सप्तमी पूजा के अवसर पर जाने-माने समाजसेवी लुत्फुल हक शहर के रेलवे कॉलोनी स्थित नारी शक्ति दुर्गा पूजा पंडाल पहुंचे और मां दुर्गा के चरणों में शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इस दौरान पूजा समिति की अध्यक्ष दीपाली साह ने माता की चुनरी ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। समाजसेवी लुत्फुल हक की मौजूदगी ने पर्व के अवसर पर आपसी सम्मान, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत का रास्ता एक है
दुर्गापूजा के इस पावन अवसर पर लुत्फुल हक ने मानवता को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इंसानियत, आपसी प्रेम और भाईचारा ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने मां दुर्गा से प्रार्थना की कि सभी के जीवन में सुख-शांति बनी रहे और समाज में प्रेम एवं सद्भाव का दीप हमेशा जलता रहे।
उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती आपसी विश्वास, सम्मान और सहयोग से आती है। विभिन्न समुदायों के लोगों का एक-दूसरे के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल होना सामाजिक एकता को मजबूत करता है और आपसी दूरियों को मिटाने में अहम भूमिका निभाता है।
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
दुर्गापूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, करुणा, प्रेम और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक भी है। ऐसे अवसरों पर विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता साझा संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब की भावना को मजबूती प्रदान करती है।
लुत्फुल हक का नारी शक्ति दुर्गा पूजा पंडाल पहुंचना भी इसी सामाजिक सौहार्द और आपसी सद्भाव की भावना को दर्शाता है। मां दुर्गा की आराधना के बीच उनका संदेश स्पष्ट रहा कि समाज में शांति और खुशहाली बनाए रखने के लिए एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करना बेहद जरूरी है।
इंसानियत और भाईचारा ही समाज की असली पहचान
आज के दौर में सामाजिक एकजुटता और आपसी विश्वास को मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि लोगों को प्रेम, सहयोग और सद्भाव के सूत्र में बांधने का माध्यम भी बनते हैं।
पाकुड़ के रेलवे कॉलोनी स्थित नारी शक्ति दुर्गा पूजा पंडाल में सामने आई यह तस्वीर यही संदेश देती है कि आस्था के रास्ते भले अलग-अलग हों, लेकिन मानवता, प्रेम और भाईचारे की मंजिल एक ही है। आपसी सम्मान और सद्भाव की यही भावना पाकुड़ की सामाजिक एकता और साझा संस्कृति की असली पहचान है।
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