पाकुड़ (Pakur): झारखण्ड के पाकुड़ जिले मे पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (जेजेए) की पाकुड़ इकाई अब निर्णायक पहल की तैयारी में है। संगठन की बैठक में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने, सभी पत्रकारों के लिए बीमा व्यवस्था सुनिश्चित करने, पत्रकारों पर दर्ज होने वाले झूठे मुकदमों पर रोक लगाने और इन मुद्दों को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने की संभावना पर गंभीर मंथन किया गया।
पाकुड़ स्थित होटल मुस्कान में जिला प्रभारी अरबिंद ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पत्रकारों ने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तभी मजबूत रह सकता है, जब पत्रकार भयमुक्त होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। वक्ताओं ने कहा कि समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों को अक्सर अनावश्यक दबाव, धमकियां, उत्पीड़न और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें मानसिक और कानूनी रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया जाता है, जिससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित होती है।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अब केवल मांग रखने तक सीमित नहीं रहा जाएगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर कानूनी स्तर पर भी प्रभावी पहल की जाएगी। इसी क्रम में झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने के विकल्प पर विस्तार से चर्चा की गई।
संगठनात्मक मजबूती को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सर्वसम्मति से तय किया गया कि संगठन का विस्तार जिले के सभी प्रखंडों तक किया जाएगा। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से प्रखंड कमिटियों का गठन होगा और उसके बाद जिला कमेटी का गठन कर संगठन को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। बैठक में कहा गया कि मजबूत संगठन ही पत्रकारों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से शासन-प्रशासन और न्यायपालिका के समक्ष रख सकेगा। 
सदस्यों ने आगामी 5 जुलाई 2026 को होने वाली बैठक में जिले के अधिकाधिक पत्रकारों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उम्मीद जताई गई कि इस बैठक में जिला कमेटी के गठन सहित कई संगठनात्मक प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बैठक के अंत में पत्रकार एकता, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया गया। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकारों का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी प्रश्न है। इस बैठक. मे कई पत्रकार साथी मौजूद rhe
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