जमशेदपुर (Jamshedpur): झारखण्ड के जमशेदपुर के बिष्टुपुर मे 24 वर्षीय हिमांशु सिंह की हत्या के बाद मचे सियासी और जनाक्रोश के बीच झारखंड सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए जमशेदपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (SP) को उनके पद से हटा दिया है। दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पुलिस की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था को लेकर पूरे राज्य में सवाल उठ रहे हैं। हिमांशु हत्याकांड ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए, बल्कि जनता के आक्रोश ने भी सरकार को त्वरित कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया।
जमशेदपुर में डेरा डालेंगे तीन वरिष्ठ अधिकारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने रांची जोन के एडीजी मनोज कौशिक, डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा और चाईबासा प्रमंडल के आयुक्त को तत्काल जमशेदपुर में कैंप करने का निर्देश दिया है। तीनों अधिकारी पूरे घटनाक्रम की निगरानी करेंगे, जांच की प्रगति पर नजर रखेंगे और शहर में कानून-व्यवस्था बहाल करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
छेड़खानी का विरोध बना मौत की वजह
शनिवार देर रात बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार में कुछ युवकों द्वारा एक महिला से कथित छेड़खानी का हिमांशु सिंह ने विरोध किया था। विवाद बढ़ने पर बार के बाउंसरों ने दोनों पक्षों को बाहर निकाल दिया। आरोप है कि बाहर पहले से घात लगाए हमलावरों ने हिमांशु और उसके दोस्त प्रत्यूष सिंह पर लाठी-डंडों और चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह ने इलाज के दौरान टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) में दम तोड़ दिया, जबकि प्रत्यूष सिंह को बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर किया गया है।
पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने पुलिस वैन से खींचकर हिमांशु पर जानलेवा हमला किया, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे। इस आरोप ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
हत्याकांड के विरोध में बिष्टुपुर गोलचक्कर पर हजारों लोग सड़क पर उतर आए। उग्र प्रदर्शन के दौरान सिटी एसपी के वाहन में तोड़फोड़ भी हुई। बढ़ते जनदबाव और पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवालों के बीच सरकार ने आखिरकार बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए दोनों जिलों के पुलिस कप्तानों को हटा दिया।
यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि राज्य सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय निगरानी अब सीधे वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में होगी।
Desk Report By IN TV








