रांची (Ranchi): लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र में पेयजल संकट का मुद्दा बुधवार को झारखंड विधानसभा में जोरदार तरीके से गूंजा। क्षेत्र के विधायक हेमलाल मुर्मू ने सदन में यह मामला उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो के समक्ष प्रस्ताव रखा। इस दौरान पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई।
क्या है पूरा मामला
विधायक ने बताया कि लिट्टीपाड़ा क्षेत्र पूरी तरह ड्राई जोन है और यहां वर्षों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। वर्ष 2017 में 217 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत से बहु-ग्रामीण जलापूर्ति योजना स्वीकृत हुई थी, जिसे 2020 तक पूरा होना था।
योजना के तहत 4 जलमीनार बनाए जाने थे, लेकिन अब तक केवल 1 ही बन पाया है। पाइपलाइन बिछाने का काम भी अधूरा है। विधायक ने लापरवाही और गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि कोविड-19 महामारी और विभिन्न विभागों से एनओसी मिलने में देरी के कारण कार्य प्रभावित हुआ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिसंबर 2026 तक योजना पूरी कर ली जाएगी।
विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि अब तक केवल 40% काम हुआ है और 60% बाकी है, ऐसे में तय समय में कार्य पूरा होना मुश्किल है। उन्होंने बिना जांच सच्चाई सामने नहीं आने की बात कही।
लंबी बहस और आश्वासन के बावजूद विधायक ने निराशा जताते हुए अपना प्रस्ताव वापस ले लिया।
निष्कर्ष:
लिट्टीपाड़ा में पेयजल संकट और अधूरी योजनाओं को लेकर एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
Desk Report by In Tv








