मुजफ्फरपुर (Mujaffarpur): बिहार मे गुरुवार की सुबह मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित ICU में अचानक आग भड़क उठी। कुछ ही मिनटों में धुएं और लपटों ने पूरे फ्लोर को अपनी चपेट में ले लिया। अस्पताल के गलियारों में मरीजों और परिजनों की चीख-पुकार गूंजने लगी। जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे, जबकि कई मरीज ICU में ही फंस गए।
इस भयावह हादसे में अब तक पांच मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 30 से अधिक मरीज झुलस गए हैं। घायलों को आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
जिनकी जिंदगी नहीं बच सकी...
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान इस प्रकार हुई है—
1.शशांक कुमार (औराई, मुजफ्फरपुर)
2.गीता देवी (मोतीपुर, मुजफ्फरपुर)
2.उदय कुमार (तरियानी, शिवहर)
4.कृष्ण नंदन सिंह (मीनापुर, मुजफ्फरपुर)
5.चंचला कुमारी
ऑपरेशन के बाद ICU में थे उदय, परिवार की आंखों के सामने उजड़ गया संसार
शिवहर जिले के विशंभरपुर निवासी उदय कुमार ब्रेन सर्जरी के बाद ICU में भर्ती थे। अस्पताल में उनकी पत्नी नीलू देवी, सास बच्ची देवी, बेटा सत्यम, बेटी आकांक्षा और साला नीतीश मौजूद थे। परिजनों ने बताया कि अचानक शोर और भगदड़ मची तो वे ICU की ओर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उदय कुमार जिंदगी की जंग हार चुके थे।
डायलिसिस के लिए भर्ती थीं गीता देवी
मोतीपुर की रहने वाली गीता देवी 1 जून से अस्पताल में भर्ती थीं। शुगर और हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी से जूझ रही गीता देवी का डायलिसिस चल रहा था। उनके बेटे अनीश ठाकुर ने बताया कि इलाज के लिए अस्पताल लाया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि अस्पताल ही उनकी मां के लिए आखिरी ठिकाना बन जाएगा।
22 मई से भर्ती थे कृष्ण नंदन सिंह
मीनापुर के गोरिगामा डीह निवासी कृष्ण नंदन सिंह फेफड़ों में पानी भरने की शिकायत के बाद 22 मई से अस्पताल में भर्ती थे। उनका इलाज जारी था, लेकिन आग की इस त्रासदी ने उनकी जिंदगी छीन ली।
जांच शुरू, उठ रहे बड़े सवाल
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, आग लगने के कारणों का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट की जताई जा रही है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल उठ रहा है कि जिस जगह लोगों की जान बचाई जाती है, वहां सुरक्षा के इंतजाम इतने कमजोर क्यों थे?
मुजफ्फरपुर का यह अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। पांच परिवारों के घरों के चिराग बुझ चुके हैं और कई जिंदगी अब भी अस्पतालों में मौत से जंग लड़ रही हैं।
Desk Report By IN TV








