पाकुड़ (Pakur): झारखण्ड के पाकुड़ नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक चाय दुकानों, नुक्कड़ और सार्वजनिक स्थानों पर कथित तौर पर अवैध लॉटरी की बिक्री का कारोबार लगातार जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर घूम-घूमकर लॉटरी बेचने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी करती रही है, लेकिन इसके बावजूद इस कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई अक्सर लॉटरी बेचते हुए पकड़े गए छोटे विक्रेताओं तक सीमित रह जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस अवैध कारोबार के पीछे मौजूद सप्लाई नेटवर्क और कथित संचालकों तक जांच क्यों नहीं पहुंच पाती?
हाल के दिनों में एक ‘WW’ कोड वाली लॉटरी की तस्वीर भी चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर इसे किसी ‘रामजी’ नामक व्यक्ति से जुड़े होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है।
बताया जा रहा है कि उक्त कोड की लॉटरी की बिक्री पाकुड़ नगर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होने की चर्चा है। यदि पुलिस को प्रथम दृष्टया कोई ठोस सुराग मिलता है, तो कानून के तहत उपलब्ध तकनीकी और जांच प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित मोबाइल नंबर, लेनदेन और संपर्कों की जांच की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि लॉटरी की आपूर्ति कहां से हो रही है और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
छोटे विक्रेताओं से आगे नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती
अवैध लॉटरी के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल बिक्री करते पकड़े गए लोगों पर कार्रवाई से पूरा नेटवर्क खत्म किया जा सकता है? यदि किसी संगठित नेटवर्क के माध्यम से लॉटरी की आपूर्ति और बिक्री हो रही है, तो उसके स्रोत, वितरण व्यवस्था और आर्थिक लेनदेन की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि पुलिस यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई करती है तो केवल मौके पर लॉटरी बेचते मिले व्यक्तियों तक सीमित न रहकर, कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरे नेटवर्क की जांच करे। इससे इस कारोबार के वास्तविक संचालकों और आपूर्ति श्रृंखला की पहचान हो सकती है।
अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में केवल खुदरा स्तर पर कार्रवाई तक सीमित रहती है या कथित अवैध लॉटरी नेटवर्क की तह तक पहुंचकर पूरे मामले का खुलासा करती है।
Desk Report By in TV








