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Sahibganj अवैध लॉटरी का ‘काला खेल’! कोटालपोखर में कथित सिंडिकेट का जाल, ‘निखिल’ का नाम चर्चा में

पुलिस की कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा कथित कारोबार, आखिर किसके इशारे पर चल रहा लॉटरी का खेल?

साहिबगंज (Sahibganj): झारखण्ड के सांगिबगंज जिले के कोटालपोखर क्षेत्र में कथित अवैध लॉटरी कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, इलाके में अवैध लॉटरी का कारोबार कथित तौर पर तेजी से पैर पसार रहा है। सूत्रों की माने तो इस मामले में ‘निखिल’ नामक व्यक्ति पर कथित रूप से लॉटरी कारोबार से जुड़े होने के आरोप सामने आ रहे हैं।
आरोप है कि कथित लॉटरी नेटवर्क का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसके जरिए बड़ी रकम का कारोबार किया जा रहा है। हालांकि, इस नेटवर्क और इससे होने वाली कथित कमाई से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं रुक रहा कारोबार?

पुलिस द्वारा अवैध लॉटरी के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि कथित कारोबार दोबारा सक्रिय हो रहा है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—आखिर इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं?
क्या पुलिस की कार्रवाई सिर्फ छोटे स्तर के कारोबारियों तक सीमित है या फिर इसके पीछे मौजूद कथित बड़े खिलाड़ियों तक भी जांच पहुंच रही है?

मोबाइल और डिजिटल लेन-देन से खुल सकता है नेटवर्क!

जानकारों के मुताबिक, यदि पुलिस मामले की गहराई से जांच करती है तो कथित कारोबार से जुड़े लोगों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, डिजिटल लेन-देन और संपर्कों की जांच से नेटवर्क की कई कड़ियां सामने आ सकती हैं।
कथित तौर पर अगर एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, तो जांच के जरिए सप्लायर, एजेंट और कथित संचालकों तक पहुंचने की संभावना बन सकती है।

लाखों-करोड़ों के कारोबार का दावा, लेकिन सबूत कहां?

स्थानीय सूत्रों की मानें तो इस कथित अवैध कारोबार से लंबे समय में लाखों-करोड़ों रुपये के लेन-देन का दावा किया जा रहा है। लेकिन इस रकम और पूरे नेटवर्क की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर अवैध लॉटरी का कारोबार लगातार जारी है, तो इसका असली संचालक कौन है?

समय रहते नहीं लगी लगाम तो ‘दीमक’ बन सकता है यह धंधा

अवैध लॉटरी का कारोबार आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है। समय रहते ऐसे कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो यह दीमक की तरह परिवारों की मेहनत की कमाई और आर्थिक व्यवस्था को खोखला कर सकता है।
अब देखना होगा कि कोटालपोखर में सामने आए इन आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और कथित नेटवर्क के पीछे छिपे मास्टरमाइंड तक पुलिस कब पहुंचती है।
निखिल पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उसकी वास्तविक भूमिका पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी

Desk Report By in Tv

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Author: In Tv

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